रामचरितमानस: धर्म का आईना या पितृसत्तात्मक समाज का सटीक चित्रण?

क्या रामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ है, या वह अपने समय की सामाजिक संरचना और पुरुषप्रधान व्यवस्था का भी प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है? यह प्रश्न लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस में आदर्श पुरुष, धर्म, त्याग और भक्ति के अनेक उदाहरण मिलते हैं, लेकिन साथ ही यह ग्रंथ उस क्या रामचरितमानस पुरुषप्रधान समाज का प्रतिबिंब है? सीता, कैकेयी, मंदोदरी और स्त्री भूमिकाओं के माध्यम से पितृसत्ता का विश्लेषण।

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